युद्ध के दौरान बाल अपहरण व अन्य 'गम्भीर उल्लंघनों' पर अंकुश लगाने के लिये नए दिशा निर्देश

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युद्ध के दौरान बाल अपहरण व अन्य 'गम्भीर उल्लंघनों' पर अंकुश लगाने के लिये नए दिशा निर्देश

सशस्त्र संघर्ष में फँसे बच्चों की पैरोकारी करने वाली संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अधिकारी वर्जीनिया गाम्बा ने नए दिशा निर्देश जारी किये हैं, जो अपहरण किये गए या अन्य गम्भीर उल्लंघनों का शिकार बच्चों की रक्षा के कार्यों में संलग्न विशेषज्ञों की मदद के लिये तैयार किये गए हैं.

विशेष प्रतिनिधि, वर्जीनिया गाम्बा ने कहा कि ये दिशा निर्देश, सशस्त्र संघर्ष में बच्चों के अपहरण की निगरानी और जानकारी देने में सहायता करेंगे, और "युद्ध के समय, बच्चों के अधिकारों के इस जटिल व गम्भीर उल्लंघन से निपटने में मदद करेंगे."

आँकड़े एकत्र करने और रिपोर्टिंग के आधार के रूप में, संयुक्त राष्ट्र द्वारा छह गम्भीर उल्लंघनों की पहचान की गई है, जैसेकि बच्चों की हत्या और अपंगता; बाल सैनिकों की भर्ती या इस्तेमाल; बच्चों के ख़िलाफ़ यौन हिंसा; अपहरण; स्कूलों या अस्पतालों पर हमले, और अन्त में, मानवीय सहायता की उपलब्धता से इनकार.

सम्बद्ध उल्लंघन 

नए मार्गदर्शन पर जारी एक प्रैस विज्ञप्ति में कहा गया है, "सशस्त्र संघर्ष में बच्चों के ख़िलाफ़ होने वाले छह गम्भीर उल्लंघन परस्पर जुड़े हुए हैं, जिनसे बच्चे अक्सर अपने अपहरण के समय अन्य गम्भीर उल्लंघनों को सहन करने के लिये मजबूर होते हैं और भर्ती व इस्तेमाल किये जाते हैं, मारे जाते हैं, अपंग कर दिये जाते हैं या यौन शोषण का शिकार होते हैं." 

यह मार्गदर्शन, "गम्भीर उल्लंघन के मामले समझने में मदद" कर सकता है, साथ ही पैरोकारी के लिये औज़ार मुहैया करा सकता है, जिसका उपयोग पक्षों द्वारा बच्चों के अपहरण की वारदातों पर अंकुश लगाने के प्रयासों के हिस्से के रूप में किया जा सकता है.

वर्जीनिया गाम्बा ने कहा, "छोड़े जाने पर या अपहर्ताओं से बचने में सफल होने के बाद भी अपहृत बच्चों को अपने समुदायों से वापस जोड़ने में काफ़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है."

"उनकी ज़रूरतों को एक व्यापक और टिकाऊ तरीक़े से सम्बोधित किया जाना चाहिये, और हम अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को प्रोत्साहित करते हैं कि वे बच्चों और सशस्त्र संघर्ष के एजेण्डे पर काम करने वाले उन सभी लोगों को सहयोग देना जारी रखें, जो संघर्ष प्रभावित बच्चों के लिये उत्कृष्ट काम कर रहे हैं."

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के विशेषज्ञ यह सुनिश्चित करने में मदद कर रहे हैं कि "गम्भीर उल्लंघनों से बचे सभी बच्चों को एक नया जीवन जीने का अवसर मिल सके, जिसमें वो पनप सकें, चाहें वो कहीं भी हों."

भारी वृद्धि

विशेष प्रतिनिधि के कार्यालय ने बताया कि हाल के वर्षों में, सशस्त्र संघर्ष के एजेण्डे में बच्चों के अपहरण के मामले तेज़ी से बढ़े हैं, चाहे समुदायों को आतंकित करना हो, विशिष्ट समूहों को निशाना बनाने के लिये किया गया हो, या लड़ाई में बच्चों को भाग लेने के लिये मजबूर करना हो. 

इस चिन्ताजनक प्रवृत्ति के जवाब में, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2015 में प्रस्ताव 2225 अपनाकर औपचारिक रूप से बच्चों के अपहरण के लिये, पक्षों को जवाबदेह ठहराने की ज़रूरत को मान्यता दी.

यह मार्गदर्शिका, विशेष प्रतिनिधि के कार्यालय द्वारा, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़), राजनीतिक व शान्ति निर्माण मामलों के विभाग (DPPA),  और शान्तिरक्षा विभाग के परामर्श से, निगरानी एवं रिपोर्टिंग तंत्र (MRM) तकनीकी सन्दर्भ के ढाँचे के अन्तर्गत तैयार की गई है.

“2020 में अपहरण की सत्यापित घटनाओं में 90 प्रतिशत की वृद्धि और 2021 में 20 प्रतिशत की निरन्तर वृद्धि के साथ, यह सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता है कि निगरानी, रिपोर्टिंग और पैरोकारी करने वाले सभी लोगों के पास, सुरक्षा परिषद के अनुरोध के अनुरूप, बाल अपहरण रोकने व समाप्त करने के लिये मज़बूत उपकरण उपलब्ध हों.

वर्जीनिया गाम्बा ने कहा, "अपहरण पर इस मार्गदर्शिका का उद्देश्य, इस तात्कालिक गम्भीर मुद्दे से निपटने की आवश्यकता पर ज़ोर देना है." 

सोमालिया, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC), सीरिया, बुर्कीना फ़ासो और लेक चाड बेसिन क्षेत्र के देशों में, 2020 व 2021 में सबसे अधिक बच्चों का अपहरण हुआ.

अधिक निशाने पर लड़कियाँ

इस मार्गदर्शिका से पता चलता है कि हालाँकि इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित लड़के थे, लेकिन लड़कियों को निशाना बनाने की दर भी ख़तरनाक रूप से बढ़ी है.

अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के उल्लंघन में, सशस्त्र संघर्ष में बच्चों का अपहरण, बच्चों,  उनके परिवारों व समुदायों के शारीरिक एवं मानसिक कल्याण पर नाटकीय प्रभाव डालता है, और दीर्घकालिक शान्ति व सुरक्षा पर भी इसका सम्भावित असर देखने को मिलता है. 

नए दिशानिर्देशों में संघर्ष के बाद के मुद्दों का भी उल्लेख किया गया है, जैसे कि शान्ति प्रक्रियाओं व शान्ति समझौतों के दौरान, अपहरण के मामलों की समाप्ति व रोकथाम में मदद करने के लिये सलाह शामिल करना, साथ ही रिहा किये गए बच्चों को समुदायों से दोबारा जोड़ने लिये, उनकी ज़रूरतों के अनुरूप दीर्घकालिक कार्यक्रम उपलब्ध कराना.

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